ख़ून की कमी: आम, और अक्सर रोकी जा सकने वाली
आधी से ज़्यादा भारतीय महिलाओं और हर तीन में से दो छोटे बच्चों में ख़ून की कमी है। जानिए इसका क्या मतलब है और क्या मदद करता है।
एनीमिया का मतलब है कि हीमोग्लोबिन बहुत कम होने से ख़ून शरीर की ज़रूरत से कम ऑक्सीजन ले जाता है। यह भारत की सबसे व्यापक स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। नवीनतम राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार 57 से 15 साल की 49 प्रतिशत महिलाएँ और छह महीने से पाँच साल के 67 प्रतिशत बच्चे एनीमिया से ग्रस्त हैं। दोनों आँकड़े पिछले सर्वेक्षण से बढ़े हैं।
यह कैसा लगता है
हल्का एनीमिया सामान्य थकान जैसा लग सकता है। बढ़ने पर सीढ़ियों पर साँस फूलना, तेज़ धड़कन, सिरदर्द, कमज़ोर एकाग्रता, पीली त्वचा और कमज़ोर नाख़ून हो सकते हैं। बच्चों में यह विकास और सीखने पर असर डाल सकता है। गर्भावस्था में यह माँ और शिशु दोनों का जोखिम बढ़ाता है।
यह क्यों होता है
सबसे आम कारण आयरन की कमी है, जो अक्सर कम आयरन वाले भोजन, कमज़ोर अवशोषण या ज़्यादा माहवारी में ख़ून जाने से होती है। विटामिन B12 और फ़ोलेट की कमी से इसके दूसरे रूप होते हैं, जो शाकाहारियों में आम हैं। संक्रमण, पेट के कीड़े और कुछ लंबी बीमारियों की भी भूमिका है।
क्या मदद करता है
- जाँच करवाएँ। एक साधारण ब्लड काउंट बताता है कि आपको एनीमिया है या नहीं। आगे की जाँच बताती है कि क्यों।
- आयरन के साथ विटामिन C लें। दाल पर नींबू, भोजन के साथ आँवला या खाने के बाद फल लेने से पौधों से मिलने वाले आयरन का अवशोषण बढ़ता है।
- चाय-कॉफ़ी अलग समय पर लें। भोजन के साथ पीने से आयरन का अवशोषण घटता है।
- आयरन से भरपूर भोजन पहचानें। हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ, दालें, रागी, तिल, अंडे, मछली और मांस।
- B12 का ध्यान रखें। शाकाहारियों को सप्लीमेंट की ज़रूरत पड़ सकती है। अपने डॉक्टर से पूछें।
- कारण का इलाज करें। ज़्यादा माहवारी, बवासीर या पेट के कीड़ों पर ध्यान देना ज़रूरी है, सिर्फ़ आयरन लेना नहीं।
एनीमिया आम है, लेकिन अपरिहार्य नहीं। यह उन गिनी-चुनी स्वास्थ्य समस्याओं में से है जिनकी जाँच सस्ती है, इलाज असरदार है और रोज़मर्रा की ज़िंदगी में फ़र्क़ कुछ ही हफ़्तों में महसूस होता है।
यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है और किसी योग्य डॉक्टर की सलाह की जगह नहीं लेता।